Tuesday, May 3, 2016

उधर

हम तुम्हारे  आदर्शों को नहीं मानते।जिन्हें तुम अपना आदर्श समझते हो मेरे लिए वह कोई खास अहम नहीं।तुम्हारे यह आदर्श जो रूस,चीन,फ़्रांस में 50 या 100 साल पहले पैदा हुए हैं वह होंगे बेहतरीन मगर मेंरे पास उनसे लाखो गुना अच्छे और सभ्य आदर्श हैं।जो बात यह 100 साल पहले कह रहे थे वह हमारे वाले हज़ारों साल पहले कह गए।सोचिये क्या राम से बेहतर समाजवाद बना पाएंगे।क्या कृष्णा से बेहतर स्वतन्त्रता की कल्पना कर पाएंगे।क्या यह पैगम्बर मोहम्मद से ज़्यादा बराबरी और उत्थान का मार्ग बना पाएंगे।क्या ईसा से ज़्यादा करुणा और सम्वेदना से भरा समाज बना पाएँगे।हरगिज़ नहीं।बुध तो वैसे भी बस के बाहर हैं इनके और हाँ यह जितने हैं इन्होंने कोई भी विचार शराब में डूब कर या व्यभिचारी बन कर नही दिए।इनकी ज़िन्दगी और विचार में कोई फ़र्क नही था।यह मदहोश,अनैतिक आचरण के भी नही थे।तुम अपने उन आदर्शों पर खूब कोटेशन देते हो मगर हम इनमे से कोई भी नाम कोट कर ले तो साम्प्रदायिक,कट्टर यह मोहर लगवा लेते हैं।इतना समझ लो वह जो पुराने वाले कह कर चले गए उसी में तुम सब उलझे से हो।मेरी बात मान लो जिसकी जो बात समाज के लिए अच्छी हो उसे स्वीकारो।उसे फैलाओ और रही बात कट्टरता की तो वो तुम खुद बहुत हो।सबसे कट्टर यही लोग हैं जिनके विचार अभी ताज़े ताज़े निकले हैं।ज़रा से इनके विरुद्ध कोई कहे तो यह सुर्ख़ यानि लाल जी हाँ लाल ही हो जाते हैं।तुम्हे मज़हब के नाम पर बुरे ही उदाहरण सूझते हैं,हम यह चाल अच्छे से जानते हैं।इतना जान लो यह ज़मीन तुम लोगों के लिए बंजर है।अगर वाक़ई लोगों में काम करना है तो उनकी आत्मा में उतरो।उनके ही धर्म से अच्छे रास्ते खोजो।उनके ही आदर्शो के उदाहरण लो।तब तो समाज के साथ चल पाओगे वरना बजाते रहो ढपली।

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