Sunday, May 15, 2016

वल्लाह रिज़ल्ट

जब यूपी बोर्ड या कोई भी राज्यिक बोर्ड का रिज़ल्ट देखता हूँ खुश हो जाता हूँ।जब यूपी बोर्ड के बच्चे अपने माँ बाप के साथ अखबारो में होते हैं तो देख कर एक अलग ख़ुशी होती है।ज़्यादतर बेहद पिछड़े परिवार से होते हैं।पैसे और समाजिक रूप से पिछड़े होते हैं,जब यह पहले पेज पर होते हैं तो देख कर लगता है की यह अखबार,यह जगह इन्ही के लिए तो है।बहुत से लोग नक़ल और कमज़ोर तरीके से कॉपी जाँचना की तोहमत लगाकर इन्हें नीचा दिखाते हैं,यह उनकी निजी खुन्नस भर है।अस्सी नब्बे के दशक में जब खूब सख्ती थी तब भी पास हुए लोगों को कौन दूसरे बोर्ड के आगे तरजीह देता था।आज अगर यूपी बोर्ड का मयार गिरा है तो भय्या किस बोर्ड का मयार बाकि है।हर बोर्ड के काले चिट्ठे हैं, तब काहे यूपी बोर्ड के होनहारों की बुराई करें।इंग्लिश,मिशनरी,सीबीएससी,आईएससी का गुरुर पहले यूपी बोर्ड प्रतिभा से तोड़ता था तो आज नम्बर से तोड़ता है।यह जो टॉपर के अलावा अस्सी प्रतिशत वाले लड़के हैं, इनके घरों का रुख करिये,इनके बर्तनों में झाँक कर देखिये कितना खाना है।यह पूछिये की मामूली फीस जमा करने पर इन्हें कितनी बार आनाकानी करनी पड़ी है।कितने किलोमीटर पैदल या साईकिल से यह दौड़े हैं।ट्यूशन के पैसे भी नही होते दोस्त।तभी तो यह जब आपकी बराबरी करते हैं तो जलन हसद नकल जैसी तोहमते लगाकर आपके दिलों को सुकून देगी।मैं कहता हूँ यह और नम्बर लाए क्योकि जब इनमे से कोई फेल होता है तो आपकी तरह इन्हें दूसरे मौके नही मिलते,इन्हें सीधे खुरपा और हल पकड़ा कर खेत में जोत दिया जाता है।सबकी ख़ुशी में शामिल होइए।मुस्कुराती लड़कियो और चहकते बच्चों पर फ़ख्र से खुश होइए।बदलते भारत की तस्वीर पर हम बेहद खुश हैं दोस्त।©

No comments:

Post a Comment