भला कोई ट्यूटर से प्यार करता है।यूँ जो तुम इश्क़ का इज़हार कर रही हो मैं इसके लिए तैयार नही था।तुम समझती क्यों नहीं।घर वाले क्या कहेंगे पढ़ाने आए थे मैथ और जोड़ घटाओ करके निकल लिए।अर्रे अब टेसुए मत बहाओ।तुम्हे पता है तुम्हारे तीन भाई,अंगद के पाँव जैसी माँ और एक आँख से टिकटिकी बाँधे बाप के बीच कैसे मोहब्बत की जाती है।महीने में चार बार प्रोजेक्ट के बहाने साइबर कैफे तक तुम्हे किस रिस्क पर ले जाता हूँ।सोचो छः महीने के ट्यूशन में आजतक प्लेस अरेंज नही कर पाया।एक तो बाहर गए नही की पूरी फ़ीस एक मुस्कुराहट पर हलाल हो जाती है।कभी समझाओ घर वालो को की होने वाले दामाद की फ़ीस बढ़ा दें मगर नही तुम तो पाओ उतनी ही फ़ीस में रात भर पढ़वाओ।बिना किसी प्लेस के जुगाड़ के हिम्मत करके ज़रा से दूर क्या निकलें घर से तुम्हे भी मरी आने लगती है।सारी इज़्ज़त वही वक़्त खतरे में पड़ती है।तब तुम्हे क्या अमरेशपुरी दिखने लगता है मुझमें।मेरे लिए तो दोहरी मार हो तुम।एक तरफ गणित जैसा सब्जेक्ट और ऊपर से सामने तुम।सवाल क्या हल होंगे,एक घण्टा शराफत से कट जाए वही क्या कम है।दिमाग तो तुम्हारी आँखों में ही उलझा रहता है।एक दर्जन हिडेन कैमरे जैसी तुम्हारे घर वालों की आँखों में एक एक समीकरण चुन चुन के बिठाना पड़ता है।ज़रा से चूके की हो गया गुणा भाग।अच्छा डरो मत कुछ तो इंतेज़ाम करते हैं।तुम्हारे लिए सब मंज़ूर।हम कैलकुलस और ट्रिगोनोमेट्रि में उसका हल ढूंढते रहे वह अपने क्लास मेट के साथ स्टेटिक्स और डायनामिक्स सीखती रही।आई थी गणित सीखने मोहब्बत सीख कर निकल ली।कमबख्त सात आठ साल छोटी क्या थी,बिलकुल बच्ची बन गई।मुँह लटका के कह दिया।सर समझिये,आप हमसे बहुत बड़े हैं।यू आर रेस्पेक्टेड।।।।निकल लो अब कोर्स की बाकि दो किताबो को क्लासमेट वाले मजनू से पढ़ लेना। रेस्पेक्टेड घण्टा। ©
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