कुछ तो खिला दो।अच्छा चलो पिला ही दो गला सूख रहा है।अब तुम यह मत कहना की पैसे नही हैं।हमने देखा है तुमने सौ रूपये वह जुगल किशोर ज्वेलर्स वाले पर्स में छुपा रखे हैं।अब पर्स को ना छुपाओ।अपने इकलौते इश्क से चोरी अच्छी नही।पक्का यक़ीन हो गया की तुम चन्दन लाला की ही ग़लती हो।कँजूस।हाथ भी नही छूने देती।मोहित की गर्लफ्रेंड क्या क्या गिफ्ट देती हैं मोहित को ,तुमने तो पेन्सिल की छीलन भी नही दी।अब घूर क्यों रही हो,खा जाओगी क्या।मैं भी लड़कियो की बराबरी का हिमायती हूँ।बल्कि बढ़ाने का हिमायती हूँ,इसीलिए तो कहता हूँ तुम खर्च किया करो।आगे आगे बढ़कर पैसे दिया करो।अब मुझसे मत कहना की पार्क का टिकेट मैं लू।दोनों अलग अलग लेंगे।तुम लड़की ही हो।बोलो।अब तुम्हारी एक्टिवा में तेल हम भरवाये।हरगिज़ नही।ज़रा से पीछे क्या बैठ गए,तेल भी हम भरवाए।ठेंगा।पार्किंग के भी पैसे भी तुम ही दो।कँजूसन।मेरी भी किस्मत देखो मिली तो वह जिसने पूरी ज़िन्दगी में सिवाय बातों के कुछ नही दिया।हर वक़्त कसमे खाती रही की ज़िन्दगी भर साथ रहूँगी और हर बार पैसे देने वाली जगह छोड़ गई।एक तो भीगे भीगे बाल ऊपर से दो महीने बड़ी।एक कप चाय भी नही पिलाई और मोहब्बत की पींगे हवा में,झूठी।कमबख्त जाते जाते भी कह गई की अपनी स्कालरशिप की पैसे से रुमाल खरीद लेना ताकि मेरे जाने के बाद बहती हुई नाक पोछ सको।चार महीने की मोहब्बत में सिवाय ग़रीबी, कुड़की के कुछ हाथ नही आया।मोटी असामी के चक्कर में मोटी मुसीबत ही मिली।वैसे वह थी बड़ी वाली,एक बार भी आँसू या मुस्कान को मुझ पर ज़ाया नही किया।पूरे वक़्त सिवाए मिस कॉल कुछ नही दिया,मैंने भी जवाब मिस कॉल से ही दिया।।इतनी मुर्दा मोहब्बत शायद ही कोई ने की हो।इतनी कँजूस मोहब्बत को तो दफ़ा करना ही था मगर उससे पहले ही वह दूसरे को अपनी काली एक्टिवा पर बिठाकर चली गई।कँजूसन। ©
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